बिक गया जो वो खरीदार नहीं हो सकता
फ़िल्म शोला और शबनम (1961) में: कैफ़ी आज़मी के शब्द, मुहम्मद रफी का स्वर और खयाम का संगीत
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बिक गया जो वो खरीदार नहीं हो सकता
डॉ. अमर कुमार
परिचय: जन्म मिथिला में, बचपन वैशाली में, प्रारंभिक शिक्षा कोसी क्षेत्र से, माध्यमिक शिक्षा एवँ जीवन से मुठभेड़ का प्रारंभ बैसवारा (रायबरेली) से, चिकित्सा स्नातक कानपुर मेडिकल कॉलेज़। सँप्रति निज चिकित्सा व्यवसाय व शौकिया लेखन रायबरेली में ही!
अभिरुचि: अपने इर्द गिर्द के सभी जड-चेतन मुझे आकर्षित करते है। उनको निरखना समझने की कोशिश करना मेरा प्रिय शगल है। लालित्य से रिश्ता रखने वाले हर क्षेत्र में टाँग अड़ाना, अतार्किक परपँराओं को तोड़ना, हर प्रकार का पठन (भाषा का बँधन नहीं) आम मान्यताओं के अनुसार खिसकेला कोटि का ब्लॉगर ('चलने दीजिये... क्या कीजियेगा' जैसे लोगों के हिसाब से यदि गलत को गलत कहना गलत है, तो ...)
आत्मकथ्य: अपने को डिस्कवर करने की मशक्कत में हूँ, बड़ा दुरूह है अभी कुछ बताना। एक उनींदे शहर के चिकित्सक को आकाश का जितना टुकड़ा दिखता है, उसीके कुछ शेड तलब ही मौज़ूद होने का सबब है। साहित्य मेरा व्यसन है और संवेदनायें मेरी पूँजी!