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शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

रूप तेरा मस्ताना (1966) - बड़े बेवफ़ा हैं


आनन्द बख्शी का गीत, लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल का संगीत, मुहम्मद रफ़ी के स्वर में

बुधवार, 28 सितंबर 2011

दुर्गे दुर्गे दुर्गोतिनाशिनि - भजन


आशा भोसले का स्वर, राहुल देव बर्मन के संगीत में संवारा

रविवार, 25 सितंबर 2011

कुछ तो मजबूरियाँ रही होंगी - कव्वाली

... यूँ कोई बेवफ़ा नहीं होता [जान ए ग़ज़ल - असलम साबरी]

अपना दिल भी टटोलकर देखो फ़ासला बेवजह नहीं होता

[आभार यूट्यूब व क्लिप अपलोडर का]

शनिवार, 24 सितंबर 2011

दिल ग़म से जल रहा है - शमा (1961)


सुमन कल्याणपुर का स्वर ग़ुलाम मुहम्मद के संगीत में
शब्द कैफ़ी आज़मी के

खिंचे हमसे साँवरे - अभिनेत्री (1970)


स्वर लता मंगेशकर का, अभिनय हेमा मालिनी और शशि कपूर का
गीत मजरूह सुल्तानपुरी और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का

बुधवार, 21 सितंबर 2011

मेरी क़िस्मत में तू नहीं शायद - प्रेमरोग (1982)


लता मंगेशकर और सुरेश वडकर के स्वर
संतोष आनन्द के शब्द, शंकर-जयकिशन का संगीत

सोमवार, 19 सितंबर 2011

रुक जा ओ जाने वाली रुक जा - कन्हैया (1959)


मुकेश का स्वर शंकर जयकिशन के संगीत में

शनिवार, 17 सितंबर 2011

काका हाथरसी का जन्मदिन और पुण्यतिथि (18 सितम्बर)

काका हाथरसी की हास्य कविता
काका हाथरसी (पद्मश्री प्रभुलाल गर्ग)
जन्म: 18 सितंबर 1906 :: निधन: 18 सितंबर 1995
पद्मश्री काका हाथरसी का जन्म बरफ़ी देवी और शिवलाल गर्ग के यहाँ हाथरस में हुआ था। जब वे मात्र 14 दिन के थे प्लेग की महामारी ने उनके पिता को छीन लिया और परिवार के दुर्दिन आरम्भ हो गये। भयंकर गरीबी में भी काका ने अपना संघर्ष जारी रखते हुए छोटी-मोटी नौकरियों के साथ ही कविता रचना और संगीत शिक्षा का समंवय बनाये रखा। उन्होने हास्य कविताओं के साथ-साथ संगीत पर पुस्तकें भी लिखीं और संगीत पर एक मासिक पत्रिका का सम्पादन भी किया। काका के कारतूस और काका की फुलझडियाँ जैसे स्तम्भों के द्वारा अपने पाठकों के प्रश्नों के उत्तर देते हुए वे अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियों के प्रति भी सचेत रहते थे। उनकी प्रथम प्रकाशित रचना 1933 में "गुलदस्ता" मासिक पत्रिका में उनके वास्तविक नाम से छपी थी।

शिव का धनुष (हास्य कविता: काका हाथरसी)

विद्यालय में आ गए इंस्पेक्टर इस्कूल
छठी क्लास में पढ़ रहा विद्यार्थी हरफूल
विद्यार्थी हरफूल, प्रश्न उससे कर बैठे
किसने तोड़ा शिव का धनुष बताओ बेटे
छात्र सिटपिटा गया बेचारा, धीरज छोड़ा
हाथ जोड़कर बोला, सर, मैंने न तोड़ा

उत्तर सुनकर आ गया, सर के सर को ताव
फौरन बुलवाए गए हेड्डमास्टर सा'ब
हेड्डमास्टर सा'ब, पढ़ाते हो क्या इनको
किसने तोड़ा धनुष नहीं मालूम है जिनको
हेडमास्टर भन्नाया, फिर तोड़ा किसने
झूठ बोलता है, ज़रूर तोड़ा है इसने

इंस्पेक्टर अब क्या कहे, मन ही मन मुस्कात
ऑफिस में आकर हुई, मैनेजर से बात
मैनेजर से बात, छात्र में जितनी भी है
उससे दुगुनी बुद्धि हेडमास्टर जी की है
मैनेजर बोला, जी हम चन्दा कर लेंगे
नया धनुष उससे भी अच्छा बनवा देंगे

शिक्षा-मंत्री तक गए जब उनके जज़्बात
माननीय गदगद हुए, बहुत खुशी की बात
बहुत खुशी की बात, धन्य हैं ऐसे बच्चे
अध्यापक, मैनेजर भी हैं कितने सच्चे
कह दो उनसे, चन्दा कुछ ज़्यादा कर लेना
जो बैलेन्स बचे वह हमको भिजवा देना
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[विडियो अल्ट्राहिन्दी से साभार :: Video Courtesy UltraHindi]
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सम्बन्धित कड़ियाँ
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* प्यार किया तो मरना क्या (ऑडिओ)
* काका हाथरसी के जन्मदिन व पुण्यतिथि पर विशेष
* काका हाथरसी की हास्य कविता

शनिवार, 10 सितंबर 2011

तेरी मेरी प्रेम कहानी - पिघलता आसमान (1981)


माया गोविन्द का गीत, कल्याण जी आनन्द जी का संगीत और स्वर अलका याज्ञिक और किशोर कुमार के

गुरुवार, 8 सितंबर 2011

तेरा साथ है तो - प्यासा सावन (1981)


संतोष आनन्द के शब्दोंको संगीतबद्ध किया है लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने,
स्वर लता मंगेशकर का और अभिनय मौसमी चटर्जी और जितेन्द्र का

सोमवार, 5 सितंबर 2011

सेवक कौ निकटी होय दिखावै

श्री गुरु अर्जुन देव जी के शब्द, भाई मनिन्दर सिंह की प्रस्तुति


अपने सेवक की आपै राखै, आपै नाम जपावै
जेह जेह काज किरत सेवक के, तहाँ तहाँ उठ धावै
सेवक कौ निकटी होय दिखावै
जो जो कहै ठाकुर पै सेवक, तत्काल हुइ जावै
तिस सेवक के हो बलिहारी, जो अपने प्रभु भावै
तिस की सोए सुनि मन हरया, नानक प्रसन्न आवै

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

जीना तो है उसी का - अधिकार (1971)


है काम आदमी का औरों के काम आना
मु. रफ़ी का स्वर आरडी बर्मन का संगीत

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