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मंगलवार, 17 मार्च 2026

हाफ़ सेंचुरी: आधी सदी का क़िस्सा

"कुछ घर की, कुछ बाहर की - Authors for Change" कार्यक्रम में

फ़ीचरिंग पूजा अनिल और अनुराग शर्मा



पुरातन पोस्ट पत्रावली

रविवार, 20 अप्रैल 2025

शुक्रवार, 28 मार्च 2025

बुधवार, 19 जनवरी 2022

बांके बिहारी लाल


साभार: माधवा रॉक बैंड की प्रस्तुति Madhavas Rock Band

पुरातन पोस्ट पत्रावली

शनिवार, 14 नवंबर 2020

शुभ दीपावली


ज्योतिपर्व पर मित्रों और परिजनों सहित आपक हार्दिक बधाई और मंगलकामनाएँ

पुरातन पोस्ट पत्रावली

शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

गुरुवार, 28 नवंबर 2019

तुम्हारे हैं, तुमसे दया मांगते हैं ...


गायक: आशा भोसळे, मुहम्मद रफ़ी
गीतकार: शैलेंद्र
संगीतकार: शंकर जयकिशन
फ़िल्म: बूट पॉलिश


पुरातन पोस्ट पत्रावली

शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

जन्माष्टमी की शुभकामनाएँ

गुरु वंदना - मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य

इम्फाल दूरदर्शन केंद्र की भेंट (कलाकार: मीना देवी)

पुरातन पोस्ट पत्रावली

बुधवार, 14 अगस्त 2019

वंदे मातरम! Happy 15th August!

भारतीय स्वतंत्रता दिवस की बधाई!

दूरदर्शन के सौजन्य से

पुरातन पोस्ट पत्रावली

शनिवार, 22 जून 2019

हिन्दी पत्रिकाओं के संपादन की चुनौतियाँ


अनुराग शर्मा और सुमन घई से शैलजा सक्सेना की वार्ता, टोरण्टो के टैग टीवी के सौजन्य से

पुरातन पोस्ट पत्रावली

शनिवार, 2 फ़रवरी 2019

गोविंद हरि गोविंद


गीत: वेद व्यास
संगीत: एम एम कीरवाणी
फ़िल्म: ओम नमो वेंकटेशाय

पुरातन पोस्ट पत्रावली

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2018

प्रियं भारतं सर्वथा दर्शनीयम् - डा. चन्द्रभानु त्रिपाठी

गायन: गैब्रियेला बर्नैल


प्रकृत्या सुरम्यं विशालं प्रकामम्
सरित्तारहारैः ललालं निकामम्
हिमाद्रिः ललाटे पदे चैव सिन्धुः
प्रियं भारतं सर्वथा दर्शनीयम्
prakṛtyā suramyaṃ viśālaṃ prakāmam
sarittārahāraiḥ lalālaṃ nikāmam
himādriḥ lalāṭe pade caiva sindhuḥ
priyaṃ bhārataṃ sarvathā darśanīyam

धनानां निधानं धरायां प्रधानम्
इदं भारतं देवलोकेन तुल्यम्
यशो यस्य शुभ्रं विदेशेषु गीतम्
प्रियं भारतं तत् सदा पूजनीयम्
dhanānāṃ nidhānaṃ dharāyāṃ pradhānam
idaṃ bhārataṃ devalokena tulyam
yaśo yasya śubhraṃ videśeṣu gītam
priyaṃ bhārataṃ tat sadā pūjanīyam

अनेके प्रदेशा अनेके च वेषाः
अनेकानि रूपाणि भाषा अनेकाः
परं यत्र सर्वे वयं भारतीयाः
प्रियं भारतं तत् सदा रक्षणीयम्
aneke pradeśā aneke ca veṣāḥ
anekāni rūpāṇi bhāṣā anekāḥ
paraṃ yatra sarve vayaṃ bhāratīyāḥ
priyaṃ bhārataṃ tat sadā rakṣaṇīyam

सुधीरा जना यत्र युद्धेषु वीराः
शरीरार्पणेनापि रक्षन्ति देशम्
स्वधर्मानुरक्ताः सुशीलाश्च नार्यः
प्रियं भारतं तत् सदा श्लाघनीयम्
sudhīrā janā yatra yuddheṣu vīrāḥ
śarīrārpaṇenāpi rakṣanti deśam
svadharmānuraktāḥ suśīlāśca nāryaḥ
priyaṃ bhārataṃ tat sadā ślāghanīyam

वयं भारतीयाः स्वभूमिं नमामः
परं धर्ममेकं सदा मानयामः
यदर्थं धनं जीवनं चार्पयामः
प्रियं भारतं तत् सदा वन्दनीयम्
vayaṃ bhāratīyāḥ svabhūmiṃ namāmaḥ
paraṃ dharmamekaṃ sadā mānayāmaḥ
yadarthaṃ dhanaṃ jīvanaṃ cārpayāmaḥ
priyaṃ bhārataṃ tat sadā vandanīyam

पुरातन पोस्ट पत्रावली

सोमवार, 19 नवंबर 2018

श्रीराम नाम रामायणम्

समस्त दक्षिण भारत में अति-प्रचलित इस लघु-रामायण रामधुन की सरल संस्कृत में लिखित 108 छोटी-छोटी पंक्तियों में सम्पूर्ण रामकथा कही गई है।

मूल धुन: तिरुवइयारु पण्डित लक्ष्मणाचार्य (1857 -1919)
गायन: श्री बालकृष्ण प्रसाद गरिमेल्ला

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सोमवार, 30 जुलाई 2018

मधुर मणिपुरी लोकगीत

विष्णुप्रिय मणिपुरी लोकगीत

मे ते हरपीलु ...

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शनिवार, 12 मई 2018

जननिऽहम रामदूत हनुमान

मातृदिवस की शुभकामनाएँ


 गीत: वसंत देव; स्वर विनोद राठौर; संगीत: वनराज भाटिया
निप्पॉन रामायण की प्रस्तुति

पुरातन पोस्ट पत्रावली

रविवार, 21 जनवरी 2018

वसंत पंचमी की शुभकामनाएँ

मेरा रंग दे वसंती चोला ...
शतनाम स्तोत्र - अंकिता जोशी

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रविवार, 19 नवंबर 2017

दिल की तपिश


फ़िल्म: कट्यार काळजात घुसली
गायक: राहुल देशपाण्डे
गीत: समीर सामंत
संगीत: शंकर एहसान लॉय

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रविवार, 4 जून 2017

देवि सुरेश्वरि भगवती गंगे


गंगा स्तोत्र - संध्या मुखर्जी (1978)

देवि! सुरेश्वरि! भगवति! गंगे त्रिभुवनतारिणि तरलतरंगे ।
शंकरमौलिविहारिणि विमले मम मतिरास्तां तव पदकमले ॥ 1 ॥

भागीरथिसुखदायिनि मातस्तव जलमहिमा निगमे ख्यातः ।
नाहं जाने तव महिमानं पाहि कृपामयि मामज्ञानम् ॥ 2 ॥

हरिपदपाद्यतरंगिणि गंगे हिमविधुमुक्ताधवलतरंगे ।
दूरीकुरु मम दुष्कृतिभारं कुरु कृपया भवसागरपारम् ॥ 3 ॥

तव जलममलं येन निपीतं परमपदं खलु तेन गृहीतम् ।
मातर्गंगे त्वयि यो भक्तः किल तं द्रष्टुं न यमः शक्तः ॥ 4 ॥

पतितोद्धारिणि जाह्नवि गंगे खंडित गिरिवरमंडित भंगे ।
भीष्मजननि हे मुनिवरकन्ये पतितनिवारिणि त्रिभुवन धन्ये ॥ 5 ॥

कल्पलतामिव फलदां लोके प्रणमति यस्त्वां न पतति शोके ।
पारावारविहारिणि गंगे विमुखयुवति कृततरलापांगे ॥ 6 ॥

तव चेन्मातः स्रोतः स्नातः पुनरपि जठरे सोपि न जातः ।
नरकनिवारिणि जाह्नवि गंगे कलुषविनाशिनि महिमोत्तुंगे ॥ 7 ॥

पुनरसदंगे पुण्यतरंगे जय जय जाह्नवि करुणापांगे ।
इंद्रमुकुटमणिराजितचरणे सुखदे शुभदे भृत्यशरण्ये ॥ 8 ॥

रोगं शोकं तापं पापं हर मे भगवति कुमतिकलापम् ।
त्रिभुवनसारे वसुधाहारे त्वमसि गतिर्मम खलु संसारे ॥ 9 ॥

अलकानंदे परमानंदे कुरु करुणामयि कातरवंद्ये ।
तव तटनिकटे यस्य निवासः खलु वैकुंठे तस्य निवासः ॥ 10 ॥

वरमिह नीरे कमठो मीनः किं वा तीरे शरटः क्षीणः ।
अथवाश्वपचो मलिनो दीनस्तव न हि दूरे नृपतिकुलीनः ॥ 11 ॥

भो भुवनेश्वरि पुण्ये धन्ये देवि द्रवमयि मुनिवरकन्ये ।
गंगास्तवमिमममलं नित्यं पठति नरो यः स जयति सत्यम् ॥ 12 ॥

येषां हृदये गंगा भक्तिस्तेषां भवति सदा सुखमुक्तिः ।
मधुराकंता पंझटिकाभिः परमानंदकलितललिताभिः ॥ 13 ॥

गंगास्तोत्रमिदं भवसारं वांछितफलदं विमलं सारम् ।
शंकरसेवक शंकर रचितं पठति सुखीः तव इति च समाप्तः ॥ 14 ॥

पुरातन पोस्ट पत्रावली

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