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रविवार, 1 मई 2011

ओ जानेवाले हो सके तो - मुकेश - बन्दिनी - 1963

समझ नहीं पाता कि मर्मांतक पीडा इतनी मधुर कैसे हो सकती है

नूतन का अभिनय, शैलेन्द्र के शब्द, मुकेश का स्वर और सचिन देव बर्मन का संगीत

पुरातन पोस्ट पत्रावली

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