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रविवार, 18 दिसंबर 2011

चल दिए सू-ए-अदम - अदम गोंडवी

"अदम गोंडवी" को यह श्रद्धांजलि श्री सलिल वर्मा द्वारा उनके ब्लॉग चला बिहारी ब्लॉगर बनने पर दी गई है।

रामनाथ सिंह "अदम" गोंडवी
(22 अक्तूबर 1947 - 18 दिसंबर 2011)

घुटने तक मटमैली धोती, बिना प्रेस किया मुचड़ा कुर्ता-बंडी और गले में मफलर ... यह हुलिया कतई एक शायर का नहीं हो सकता। और अगर यह कहें कि यह हुलिया एक मुशायरे के रोज एक शायर का है तो आपको ताज्जुब होगा। ऐसे शख्स थे जनाब राम नाथ सिंह उर्फ अदम गोंडवी। मुशायरों में इनकी शायरी पर जितनी वाह-वाह होती रहे, उनके चहरे से कभी ऐसा नहीं लगा कि उन्होंने कोइ बड़ी बात कह दी हो। आज जब किसी शायर को, शेर के वज़न से ज़्यादा, खुद की एक्टिंग से शेर में असर पैदा करते देखता/सुनता हूँ, तो लगता है कि अदम साहब की सादगी ही उनका बयान थी। जो शख्स भूख पर शायरी करता हो, उसने भूखे रहकर वो दर्द महसूस किया है, जो उसके बयान में है।

हमारे समय के इस महान शायर को हार्दिक श्रद्धांजलि!

[ब्लॉग पर जाकर पोस्ट पढने और श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिये यहाँ क्लिक करें]

6 टिप्‍पणियां:

Monika Jain "मिष्ठी" ने कहा…

हार्दिक श्रद्धांजलि

Maheshwari kaneri ने कहा…

इस महान शायर को हार्दिक श्रद्धांजलि!....

चंदन कुमार मिश्र ने कहा…

अदम साहब का नाम यहाँ ही पढा। शुक्रिया!

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Har aadmi ko apna samay chakr poora karke jaana hi padta hai,
dhanwadi ho janwadi .

शुक्रिया!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

KYA SHAYAR THE ADAM SAHAB...UFF...BEMISAAL...ISHWAR UNKI AATMA KO SHANTI DE

NEERAJ

निरामिष ने कहा…

अश्रुपूरित श्रद्धांजलि, कवि हमेशा अमर रहता है अपनी रचनाओं में

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