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सोमवार, 18 अप्रैल 2011

हमसे मत उलझो तुम इस क्षण - रथवान

प्राख्यात कवि पण्डित नरेन्द्र शर्मा की तेजस्वी रचना श्रीमती लावण्या शाह के मधुर स्वर में पढिये, सुनिये या डाउनलोड कीजिये पिट ऑडिओ पर

श्रीमती लावण्या शाह
हम हरि के धन के रथ-वाहक,
तुम तस्कर, पर-धन के गाहक।
हम हैं, परमारथ-पथ-गामी
तुम रत स्वारथ में।
हमें तुम, रोको मत पथ में।

अनधिकार कर जतन थके तुम,
छाया भी पर छू न सके तुम!
सदा-स्वरूपा एक सदृश वह
पथ के इति-अथ में।
हमें तुम, रोको मत पथ में।



अनाचार का प्रखर विरोध सतत करते हुए भी शिष्टता कैसे बनाये रखी जा सकती है, इसका अनन्य उदाहरण है उपरोक्त रचना।

[ब्लॉग पर जाकर सम्पूर्ण रचना पढने, सुनने व डाउनलोड करने के लिये यहाँ क्लिक करें]

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